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सूरह अत तौबा [09]

सूरह तौबा के संक्षिप्त विषय यह सूरह मदनी है, इस में  129  आयतें है। इस सुरह में तौबा की शुभ सूचना तथा वचन भंगी काफ़िरों से विरक्त होने की घोषणा है। इसलिये इस का नाम सूरह तौबा और बराआ (विरक्ति) दोनों है। यह सन् (8-9) हिजरी के बीच मक्का की विजय के पश्चात् नबी (सल्लल्लाह अलैहि व सल्लम) पर समय-समय से उतरी। और सन् (9) हिजरी में जब आप ने अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अन्हु) को हज्ज का अमीर बना कर भेजा तो इस की आरंभिक आयतें उतरीं। और यह एलान किया गया कि काफिरों से संधि तोड़ दी गई और अहले किताब से संबंधित इस्लामी शासन की नीति बताते हुये उन्हें सावधान किया गया। इस में इस्लामी वर्ष और महीने का पालन करने का निर्देश दिया गया। तबूक के युद्ध के लिये मुसलमानों को उभारा गया तथा मुनाफ़िकों की निन्दा की गई जो जिहाद से जी चुराते थे। यह बताया गया कि ज़कात किन को दी जाये। और ईमान वालों को सफल होने की शुभ सूचना दी गई। मुनाफ़िकों के साथ जिहाद करने का आदेश दिया गया। और उन्हें सुधर जाने और अल्लाह तथा रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की आज्ञा का पालन करने को कहा गया अन्यथा वह अपने ईमान के दावे में झू...