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सूरह युसूफ [12]

सूरह यूसुफ के संक्षिप्त विषय यह सूरह मक्की है, इस में 111 आयतें हैं। इस में  नबी यूसुफ (अलैहिस्सलाम)  की पूरी कथा का वर्णन किया गया है। इस के द्वारा यह संकेत किया गया है कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जिन को मक्का में कुरैश ने जान से मार देने अथवा देश से निकाल देने की योजना बनायी है वह ऐसे ही निष्फल हो जायेंगे जैसे यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के भाईयों की सारी योजना निष्फल हो गई| और एक दिन ऐसा भी आया कि सब भाई उन के आगे हाथ फैलाये खड़े थे| और कुआन की यह भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हुई। आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मदीना हिज्रत कर गये| फिर सन् (8) हिज्री में आप ने मक्का को विजय किया तो आप के विरोधि कुरैश आप के आगे उसी प्रकार विवश खड़े थे जैसे युसुफ (अलैहिस्सलाम) के भाई उन के आगे हाथ फैलाये कह रहे थे की आप हमे दान कीजिये, अल्लाह दानशीलों को अच्छा बदला देता है। और जैसे यूसुफ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाईयों को क्षमा कर दिया वैसे ही आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने भी कहाः जाओ, तुम पर कोई दोष नहीं, अल्लाह तुम्हें क्षमा करे वह सर्वोत्तम दयावान् है| आप उन के अत्याचार का बदला ले सकते ...