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सूरह अल-इन्शिकाक [84]

﴾  1  ﴿ जब आकाश फट जायेगा। ﴾  2  ﴿ और अपने पालनहार की सुनेगा और यही उसे करना भी चाहिये। ﴾  3  ﴿ तथा जब धरती फैला दी जायेगी। ﴾  4  ﴿ और जो उसके भीतर है, फैंक देगी तथा ख़ाली हो जायेगी। ﴾  5  ﴿ और अपने पालनहार की सुनेगी और यही उसे करना भी चाहिये। [1] 1. (1-5) इन आयतों में प्रलय के समय आकाश एवं धरती में जो हलचल होगी उस का चित्रण करते हुये यह बताया गया है कि इस विश्व के विधाता के आज्ञानुसार यह आकाश और धरती कार्यरत हैं और प्रलय के समय भी उसी की आज्ञा का पालन करेंगे। धरती को फैलाने का अर्थ यह है कि पर्वत आदि खण्ड-खण्ड हो कर समस्त भूमि चौरस कर दी जायेगी। ﴾  6  ﴿ हे इन्सान! वस्तुतः, तू अपने पालनहार से मिलने के लिए परिश्रम कर रहा है और तू उससे अवश्य मिलेगा। ﴾  7  ﴿ फिर जिस किसी को उसका कर्मपत्र दाहिने हाथ में दिया जायेगा। ﴾  8  ﴿ तो उसका सरल ह़िसाब लिया जायेगा। ﴾  9  ﴿ तथा वह अपनों में प्रसन्न होकर वापस जायेगा। ﴾  10  ﴿ और जिन्हें उनका कर्मपत्र बायें हाथ में दिया जायेगा। ﴾...