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सूरह अन-नाज़िआ़त [79]

﴾  1  ﴿ शपथ है उन फ़रिश्तों की जो डूबकर  (प्राण)  निकालते हैं! ﴾  2  ﴿ और जो सरलता से  (प्राण)  निकालते हैं। ﴾  3  ﴿ और जो तैरते रहते हैं। ﴾  4  ﴿ फिर जो आगे निकल जाते हैं। ﴾  5  ﴿ फिर जो कार्य की व्यवस्था करते हैं। [1] 1. (1-5) यहाँ से बताया गया है कि प्रलय का आरंभ भारी भूकम्प से होगा और दूसरे ही क्षण सब जीवित हो कर धरती के ऊपर होंगे। ﴾  6  ﴿ जिस दिन धरती काँपेगी। ﴾  7  ﴿ जिसके पीछे ही दूसरी कम्प आ जायेगी। ﴾  8  ﴿ उस दिन बहुत-से दिल धड़क रहे होंगे। ﴾  9  ﴿ उनकी आँखें झुकी होंगी। ﴾  10  ﴿ वे कहते हैं कि क्या हम फिर पहली स्थिति में लाये जायेंगे? ﴾  11  ﴿ जब हम  (भुरभुरी)   (खोखली)  अस्थियाँ  (हड्डियाँ)  हो जायेंगे। ﴾  12  ﴿ उन्होंने कहाः तब तो इस वापसी में क्षति है। ﴾  13  ﴿ बस वह एक झिड़की होगी। ﴾  14  ﴿ तब वे अकस्मात धरती के ऊपर होंगे। ﴾  15  ﴿  (हे नबी!) ...