संदेश

सूरह अल-इन्सान लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सूरह अल-इन्सान [76]

﴾  1  ﴿ क्या व्यतीत हुआ मनुष्य पर युग का एक समय, जब वह कोई विचर्चित [1]  वस्तु न था? 1. अर्थात उस का कोई अस्तित्व न था। ﴾  2  ﴿ हमने ही पैदा किया मनुष्य को मिश्रित  (मिले हुए)  वीर्य [1]  से, ताकि उसकी परीक्षा लें और बनाया उसे सुनने तथा देखने वाला। 1. अर्थात नर-नारी के मिश्रित वीर्य से। ﴾  3  ﴿ हमने उसे राह दर्शा दी। [1]   (अब)  वह चाहे तो कृतज्ञ बने अथवा कृतघ्न। 1. अर्थात नबियों तथा आकाशीय पुस्तकों द्वारा, और दोनों का परिणाम बता दिया गया। ﴾  4  ﴿ निःसंदेह, हमने तैयार की काफ़िरों  (कृतघ्नों)  के लिए ज़ंजीर तथा तौक़ और दहकती अग्नि। ﴾  5  ﴿ निश्चय सदाचारी  (कृतज्ञ)  पियेंगे ऐसे प्याले से जिसमें कपूर मिश्रित होगा। ﴾  6  ﴿ ये एक स्रोत होगा, जिससे अल्लाह के भक्त पियेंगे। उसे बहा ले जायेंगे  (जहाँ चाहेंगे) । [1] 1. अर्थात उस को जिधर चाहेंगे मोड़ ले जायेंगे। जैसे घर, बैठक आदि। ﴾  7  ﴿ जो  (संसार में)  पूरी करते रहे मनोतियाँ [1]  और डरते रहे उ...