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सूरह अल-फतह [48]

﴾  1  ﴿ हे नबी! हमने विजय [1]  प्रदान कर दी आपको खुली विजय। 1. ह़दीस में है कि इस से अभिप्राय ह़ुदैबिया की संधि है। (बुख़ारीः 4834) ﴾  2  ﴿ ताकि क्षमा कर दे [1]  अल्लाह आपके लिए, आपके अगले तथा पिछले दोषों को तथा पूरा करे अपना पुरस्कार, आपके ऊपर और दिखाये आपको सीधी राह। 1. ह़दीस में है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात्रि में इतनी नमाज़ पढ़ा करते थे कि आप के पाँव सूज जाते थे। तो आप से कहा गया कि आप ऐसा क्यों करते हैं? अल्लाह ने तो आप के विगत तथा भविष्य के पाप क्षमा कर दिये हैं? तो आप ने फ़रमायाः तो क्या मैं कृतज्ञ भक्त न बनूँ? (सह़ीह़ बुख़ारीः 4837) ﴾  3  ﴿ तथा अल्लाह आपकी सहायता करे भरपूर सहायता। ﴾  4  ﴿ वही है, जिसने उतारी शान्ति ईमान वालों के दिलों में, ताकि अधिक हो जाये उनका ईमान अपने ईमान के साथ तथा अल्लाह ही की हैं, आकाशों तथा धरती की सेनायें तथा अल्लाह सब कुछ और सब गुणों को जानने वाला है। ﴾  5  ﴿ ताकि वह प्रवेश कराये ईमान वाले पुरुषों तथा स्त्रियों को ऐसे स्वर्गों में, बह रही हैं जिनमें नहरें और वे सदैव रहें...