संदेश

सूरह अल-हुजरात लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सूरह अल-हुजरात [49]

﴾  1  ﴿ हे लोगो जो ईमान लाये हो! आगे न बढ़ो अल्लाह और उसके रसूल [1]  से और डरो अल्लाह से। वास्तव में, अल्लाह सब कुछ सुनने-जानने वाला है। 1. अर्थात दीन धर्म तथा अन्य दूसरे मामलात के बारे में प्रमुख न बनो। अनुयायी बन कर रहो। और स्वयं किसी बात का निर्णय न करो। ﴾  2  ﴿ हे लोगो जो ईमान लाये हो! अपनी आवाज़, नबी की आवाज़ से ऊँची न करो और न आपसे ऊँची आवाज़ में बात करो, जैसे एक-दूसरे से ऊँची आवाज़ में बात करते हो। ऐसा न हो कि तुम्हारे कर्म व्यर्थ हो जायें और तुम्हें पता  (भी)  न हो। ﴾  3  ﴿ निःसंदेह, जो धीमी रखते हैं अपनी आवाज़, अल्लाह के रसूल के सामने, वही लोग हैं, जाँच लिया है अल्लाह ने जिनके दिलों को, सदाचार के लिए। उन्हीं के लिए क्षमा तथा बड़ा प्रतिफल है। ﴾  4  ﴿ वास्तव में जो आपको पुकारते [1]  हैं कमरों के पीछे से, उनमें से अधिक्तर निर्बोध हैं। 1. ह़दीस में है कि बनी तमीम के कुछ सवार नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आये तो आदरणीय अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने कहा कि क़ाक़ाअ बिन उमर को इन का प्रमुख बनाया जाये। और आदरण...