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सूरह अल-अनाम [06]

सूरह अनआम के संक्षिप्त विषय यह सूरह मक्की है, इस में  165  आयते हैं अनआम का अर्थः चौपाये होता है। इस सूरह में कुछ चौपायों के वैध तथा अवैध होने के संबंध में अरब वासियों के भ्रम का खण्डन किया गया है। और इसी लिये इस सूरह का नाम (अन्नाम) रखा गया है। इस में शिर्क का खण्डन किया गया है। और एकेश्वर का आमंत्रण दिया गया है। इस में आख़िरत (परलोक) के प्रति आस्था का प्रचार है। तथा इस कुविचार का खण्डन है कि जो कुछ है यही संसारिक जीवन है। इस में उन नैतिक नियमों को बताया गया है जिन पर इस्लामी समाज की स्थापना होती है और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के विरुध्द आपत्तियों का उत्तर दिया गया है। आकाशों तथा धरती और स्वयं मनुष्य में अल्लाह के एक होने की निशानियों पर ध्यान दिलाया गया है। इस में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) तथा मुसलमानों को दिलासा दी गई है। इस्लाम के विरोधियों को उन की अचेतना पर सावधान किया गया है। अन्त में कहा गया है कि लोगों ने अलग-अलग धर्म बना लिये है जिन का सत्य धर्म से कोई संबंध नहीं। और प्रत्येक अपने कर्म का उत्तरदायी है। अल्लाह के नाम से जो अत्यन्त कृपाशील त...