सूरह अल-मुमिनून [23]
﴾ 1 ﴿ सफल हो गये ईमान वाले। ﴾ 2 ﴿ जो अपनी नमाज़ों में विनीत रहने वाले हैं। ﴾ 3 ﴿ और जो व्यर्थ [1] से विमुख रहने वाले हैं। 1. अर्थात प्रत्येक व्यर्थ कार्य तथा कथन से। आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः जो अल्लाह और प्रलय के दिन पर ईमान रखता हो वह अच्छी बात बोले अन्यथा चुप रहे। (सह़ीह़ बुख़ारीः6019, मुस्लिमः 48) ﴾ 4 ﴿ तथा जो ज़कात देने वाले हैं। ﴾ 5 ﴿ और जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करने वाले हैं। ﴾ 6 ﴿ परन्तु अपनी पत्नियों तथा अपने स्वामित्व में आयी दासियों से, तो वही निन्दित नहीं हैं। ﴾ 7 ﴿ फिर जो इसके अतिरिक्त चाहें, तो वही उल्लंघनकारी हैं। ﴾ 8 ﴿ और जो अपनी धरोहरों तथा वचन का पालन करने वाले हैं। ﴾ 9 ﴿ तथा जो अपनी नमाज़ों की रक्षा करने वाले हैं। ﴾ 10 ﴿ यही उत्तराधिकारी हैं। ﴾ 11 ﴿ जो उत्तराधिकारी होंगे फ़िर्दौस [1] के, जिसमें वे सदावासी होंगे। 1. फ़िर्दौस, स्वर्ग का सर्वोच्च स्थान। ﴾ 12 ﴿ और हमने उत्पन्न...