संदेश

सूरह अन-नूर लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सूरह अन-नूर [24]

﴾  1  ﴿ ये एक सूरह है, जिसे हमने उतारा तथा अनिवार्य किया है और उतारी हैं इसमें बहुत-सी खुली आयतें  (निशानियाँ) , ताकि तुम शिक्षा ग्रहण करो। ﴾  2  ﴿ व्यभिचारिणी तथा [1]  व्यभिचारी, दोनों में से प्रत्येक को सौ कोड़े मारो और तुम्हें उन दोनों पर कोई तरस न आये अल्लाह के धर्म के विषय [2]  में, यदि तुम अल्लाह तथा अन्तिम दिन पर ईमान  (विश्वास)  रखते हो और चाहिए कि उनके दण्ड के समय उपस्थित रहे ईमान वालों का एक [3]  गिरोह। 1. व्यभिचार से संबंधित आरंभिक आदेश सूरह निसा, आयत 15 में आ चुका है। अब यहाँ निश्चित रूप से उस का दण्ड नियत कर दिया गया है। आयत में वर्णित सौ कोड़े दण्ड अविवाहित व्यभिचारी तथा व्याभिचारिणी के लिये हैं। आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अविवाहित व्यभिचारी को सौ कोड़े मारने का और एक वर्ष देश से निकाल देने का आदेश देते थे। (सह़ीह़ बुख़ारीः 6831) किन्तु यदि दोनों में कोई विवाहित है तो उस के लिये रज्म (पत्थरों से मार डालने) का दण्ड है। आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः मुझ से (शिक्षा) ले लो, मुझ से (शिक्षा) ले लो। अल्लाह ने उन क...