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सूरह ताहा [20]

﴾  1  ﴿ ता, हा। ﴾  2  ﴿ हमने नहीं अवतरित किया है आपपर क़ुर्आन इस लिए कि आप दुःखी हों [1] । 1. अर्थात विरोधियों के ईमान न लाने पर। ﴾  3  ﴿ परन्तु ये उसकी शिक्षा के लिए है, जो डरता [1]  हो। 1. अर्थात ईमान न लाने तथा कुकर्मों के दुष्परिणाम से। ﴾  4  ﴿ उतारा जाना उस ओर से है, जिसने उत्पत्ति की है धरती तथा उच्च आकाशों की। ﴾  5  ﴿ जो अत्यंत कृपाशील, अर्श पर स्थिर है। ﴾  6  ﴿ उसी का [1]  है, जो आकाशों, जो धरती में, जो दोनों के बीच तथा जो भूमि के नीचे है। 1. अर्थात उसी के स्वामित्व में तथा उसी के अधीन है। ﴾  7  ﴿ यदि तुम उच्च स्वर में बात करो, तो वास्तव में, वह जानता है भेद को तथा अत्यधिक छुपे भेद को। ﴾  8  ﴿ वही अल्लाह है, नहीं है कोई वंदनीय  (पूज्य)  परन्तु वही। उसी के उत्तम नाम हैं। ﴾  9  ﴿ और  (हे नबी!)  क्या आपको मूसा की बात पहुँची? ﴾  10  ﴿ जब उसने देखी एक अग्नि, फिर कहा अपने परिवार सेः रुको, मैंने एक अग्नि देखी है, सम्भव है कि मैं तुम्हारे ...