सूरह मरियम [19]
﴾ 1 ﴿ काफ़, हा, या, ऐन, स़ाद। ﴾ 2 ﴿ ये आपके पालनहार की दया की चर्चा है, अपने भक्त ज़करिय्या पर। ﴾ 3 ﴿ जबकि उसने अपने पालनहार से विनय की, गुप्त विनय। ﴾ 4 ﴿ उसने कहाः मेरे पालनहार! मेरी अस्थियाँ निर्बल हो गयीं, सिर बुढ़ापे से सफेद [1] हो गया है तथा मेरे पालनहार! कभी ऐसा नहीं हुआ कि तुझसे प्रार्थना करके निष्फल हुआ हूँ। 1. अर्थात पूरे बाल सफ़ेद हो गये। ﴾ 5 ﴿ और मुझे अपने भाई-बंदों से भय [1] है, अपने (मरण) के पश्चात् तथा मेरी पत्नी बाँझ है, अतः मुझे अपनी ओर से एक उत्तराधिकारी प्रदान कर दे। 1. अर्थात दुराचार और बुरे व्यवहार का। ﴾ 6 ﴿ वह मेरा उत्तराधिकारी हो तथा याक़ूब के वंश का उत्तराधिकारी [1] हो और हे मेरे पालनहार! उसे प्रिय बना दे। 1. अर्थात नबी हो। आदरणीय ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) याक़ूब (अलैहिस्सलाम) के वंश में थे। ﴾ 7 ﴿ हे ज़करिय्या! हम तुझे एक बालक की शुभ सूचना दे रहे हैं, जिसका नाम यह़्या होगा। हमने नहीं बनाया है, इससे पहले उसका कोई समनाम। ﴾ 8 ﴿ उ...