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सूरह इब्राहीम [14]

﴾  1  ﴿ अलिफ़, लाम, रा। ये  (क़ुर्आन)  एक पुस्तक है, जिसे हमने आपकी ओर अवतरित किया है, ताकि आप लोगों को अंधेरों से निकालकर प्रकाश की ओर लायें, उनके पालनहार की अनुमति से, उसकी राह की ओर, जो बड़ा प्रबल सराहा हुआ है। ﴾  2  ﴿ अल्लाह की ओर। जिसके अधिकार में आकाश और धरती का सब कुछ है तथा काफ़िरों के लिए कड़ी यातना के कारण विनाश है। ﴾  3  ﴿ जो सांसारिक जीवन को परलोक पर प्रधानता देते हैं, अल्लाह की डगर  ( इस्लाम)  से रोकते हैं और उसे कुटिल बनाना चाहते हैं, वही कुपथ में दूर निकल गये हैं। ﴾  4  ﴿ और हमने किसी  (भी)  रसूल को उसकी जाति की भाषा ही में भेजा, ताकि वह उनके लिए बात उजागर कर दे। फिर अल्लाह जिसे चाहता है, कुपथ करता है और जिसे चाहता है, सुपथ दर्शा देता है और वही प्रभुत्वशाली और ह़िक्मत वाला है। ﴾  5  ﴿ और हमने मूसा को अपनी आयतों  (चमत्कारों)  के साथ भेजा, ताकि अपनी जाति को अन्धेरों से निकालकर प्रकाश की ओर लायें और उन्हें अल्लाह के दिनों  (पुरस्कार और यातना)  का स्मरण करायें। वास्तव...