सूरह अल-मुज़म्मिल [73]
﴾ 1 ﴿ हे चादर ओढ़ने वाले! ﴾ 2 ﴿ खड़े रहो (नमाज़ में) रात्रि के समय, परन्तु कुछ [1] समय। 1. ह़दीस में है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात में इतनी नमाज़ पढ़ते थे कि आप के पैर सूज जाते थे। आप से कहा गयाः ऐसा क्यों करते हैं? जब कि अल्लाह ने आप के पहले और पिछले गुनाह क्षमा कर दिये हैं? आप ने कहाः क्या मैं उस का कृतज्ञ भक्त न बनूँ? (बुख़ारीः 1130, मुस्लिमः 2819) ﴾ 3 ﴿ (अर्थात) आधी रात अथवा उससे कुछ कम। ﴾ 4 ﴿ या उससे कुछ अधिक और पढ़ो क़ुर्आन रुक-रुक कर। ﴾ 5 ﴿ हम उतारेंगे (हे नबी!) आप पर एक भारी बात (क़ुर्आन) । ﴾ 6 ﴿ वास्तव में, रात में जो इबादत होती है, वह अधिक प्रभावी है (मन को) एकाग्र करने में तथा अधिक उचित है बात प्रार्थना के लिए। ﴾ 7 ﴿ आपके लिए दिन में बहुत-से कार्य हैं। ﴾ 8 ﴿ और स्मरण (याद) करें अपने पालनहार के नाम की और सबसे अलग होकर उसी के हो जायें। ﴾ 9 ﴿ वह पूर्व तथा पश्चिम का पालनहार ...