सूरह यासीन [36]
सूरह यासीन के संक्षिप्त विषय यह सूरह मक्की है, इस में 83 आयतें हैं। सूरह के प्रथम दो शब्दों से इस को यह नाम दिया गया है। इस में रसूल के सत्य होने पर कुआन की गवाही से यह बताया गया है कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को अचेत लोगों को जगाने के लिये भेजा गया है। और इस में उस का एक उदाहरण दिया गया है। तौहीद की निशानियाँ बता कर विरोधियों का खण्डन किया गया है। और इस प्रकार सावधान किया गया है जिस से लगता है कि प्रलय आ गई है। रिसालत, तौहीद तथा दूसरे जीवन के संबंध में विरोधियों की अपत्तियों का जवाब दिया गया है। अल्लाह के नाम से जो अत्यन्त कृपाशील तथा दयावान् है। ﴾ 1 ﴿ या सीन। ﴾ 2 ﴿ शपथ है सुदृढ़ क़ुर्आन की! ﴾ 3 ﴿ वस्तुतः, आप रसूलों में से हैं। ﴾ 4 ﴿ सुपथ पर हैं। ﴾ 5 ﴿ (ये क़ुर्आन) प्रभुत्वशाली, अति दयावान् का अवतरित किया हुआ है। ﴾ 6 ﴿ ताकि आप सावधान करें उस जाति [1] को, नहीं सावधान किये गये हैं जिनके पूर्वज। इस लिए वे अचेत हैं। 1. मक्का वासियों को, जिन के पास इस्माईल...