सूरह अन-नज्म [53]
﴾ 1 ﴿ शपथ है तारे की, जब वह डूबने लगे! ﴾ 2 ﴿ नहीं कुपथ हुआ है तुम्हारा साथी और न कुमार्ग हुआ है। ﴾ 3 ﴿ और वह नहीं बोलते अपनी इच्छा से। ﴾ 4 ﴿ वह तो बस वह़्यी (प्रकाशना) है। जो (उनकी ओर) की जाती है। ﴾ 5 ﴿ सिखाया है जिसे उन्हें शक्तिवान ने। [1] 1. इस से अभिप्राय जिब्रील (अलैहिस्सलाम) हैं जो वह़्यी लाते थे। ﴾ 6 ﴿ बड़े बलशाली ने, फिर वह सीधा खड़ा हो गया। ﴾ 7 ﴿ तथा वह आकाश के ऊपरी किनारे पर था। ﴾ 8 ﴿ फिर समीप हुआ और फिर लटक गया। ﴾ 9 ﴿ फिर हो गया दो कमान के बराबर अथवा उससे भी समीप। ﴾ 10 ﴿ फिर उसने वह़्यी की उस (अल्लाह) के भक्त [1] की ओर, जो भी वह़्यी की। 1. अर्थात मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की ओर। इन आयतों में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के जिब्रील (फरिश्ते) को उन के वास्तविक रूप में दो बार देखने का वर्णन है। आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने कहाः जो कहे कि मुह़म्मद (सल्लल्लहु अलैहि व सल्लम) ने अल्लाह को देखा ...